मंगलवार, 29 अप्रैल 2008

आपने क्‍या खोया क्‍या पाया

Money is lost nothing is lost, Health is lost something is lost, Character is lost everything is lost.

आपने धन गँवा दिया समझिये कुछ नहीं खोया, आपने स्‍वास्‍थ्‍य गंवाया समझिये कुछ खो दिया, आपने अपना चरित्र गंवाया समझिये आपका सब कुछ खो गया नष्‍ट हो गया । - अँग्रेजी की एक कहावत

रविवार, 27 अप्रैल 2008

कलयुगी साधु सन्‍त कैसे और उनके क्‍या असर हैं

तपसी धनवन्‍त दरिद्र गृही । कलि कौतुक तात न जात कही ।।

कलि बारहिं बार दुकाल परे । बिन अन्‍न दुखी सब लोग मरे ।।

अर्थात गोस्‍वामी तुलसीदास जी ने रामचरित मानस में लेख किया है कि कलयुग में तपस्‍वी और साधु सन्‍त तो धनवान होंगे (हेलीकॉप्‍टरों से यात्रा करेंगे, राजसी भोग विलास का सुख उपभोग कर आनन्‍द उठायेंगें ) और गृहस्‍थ मनुष्‍य बेचारे दरिद्र होंगे । कलयुग में बार बार भीषण अकाल दुकाल पड़ेंगे, बिना अन्‍न (अनाज) के सब लोग दुखी हो हो कर मरेंगें । कलयुग में ऐसी ऐसी चित्र विचित्र लीलायें होंगीं कि जिनका वर्णन करना बड़ा ही मुश्किल है । - तुलसीदास, रामचरित मानस (उत्‍तरकाण्‍ड) तप व साधना से साधन की प्राप्ति हो सकती है, किन्‍तु साधन से साधना व तप प्राप्‍त नहीं हो सकते बाबा बालकदास

  

बुधवार, 23 अप्रैल 2008

अपने पराये और अच्‍छे बुरे की परीक्षा कब और कैसे होती है

धीरज धरम मित्र और नारी, आपदकाल परखिये चारी ।।

धैर्य अर्थात धीरज, धर्म, मित्र और नारी की परीक्षा विपत्ति या आफत के समय करनी चाहिये तुलसीदास, रामचरित मानस

रहिमन विपदा हू भली जो थोरे दिन होय । भलो बुरो सब आपुनो, जान परत सब कोय ।। रहीम जी कहते हैं कि विपत्ति यदि थोड़े समय की आये तो बहुत अच्‍छी होती है, इसमें अपने पराये और भले बुरे सबकी पहचान हो जाती है रहीम  

मंगलवार, 22 अप्रैल 2008

मनुष्‍य का उत्‍थान व पतन कैसे होता है

जब मनुष्‍य अपने पूर्वजों और पितृगण व बुजुर्गों को बुरा भला कह कर गालियां देने लगता है, तो समझिये उसने पतन के रास्‍ते पर पहला कदम रख दिया ऐसे मनुष्‍य का पतन सुनिश्चित है, और जब मनुष्‍य स्‍वयं अपने आप में खोट देखने लगता है स्‍वयं को बुरा भला कह कर गालियां देना शुरू कर देता है तो समझिये उसने उन्‍नति व उत्‍थान के रास्‍ते पर पहला कदम रख दिया है, ऐसे मनुष्‍य की उन्‍नति व उत्‍थान सुनिश्पित है स्‍वामी विवेकानन्‍द

सोमवार, 21 अप्रैल 2008

भगवान किस मंदिर में मिलेंगे

हरि व्‍यापक सर्वत्र समाना । प्रेम सों प्रकट होंहिं मैं जाना ।।

भगवान तो सभी जगह समान रूप से व्‍याप्‍त हैं, वे केवल प्रेम से ही कहीं भी प्रकट किये जा सकते हैं  - गोस्‍वामी तुलसीदास, रामचरित मानस

मंदिर तो भगवान का कैदखाना है, गरीब की झोंपड़ी और भक्‍त का हृदय ही भगवान का घर अर्थात मंदिर है उनकी उपस्थिति तो जगत के कण कण में है संकलित   

 

रविवार, 20 अप्रैल 2008

धर्म और अधर्म में क्‍या फर्क है

परहित सरिस धरम नहिं भाई । परपीड़ा सम नहिं अधमाई ।।

दूसरों का भला करने से बड़ा कोई धर्म नहीं है और दूसरों को पीड़ा पहुँचाने से बड़ा अधर्म नहीं है गोस्‍वामी तुलसीदास, रामचरित मानस

शनिवार, 19 अप्रैल 2008

घर में धन बढ़ने पर क्‍या करें

जो जल बाढ़े नाव में और घर में बाढ़े दाम । दोऊ हाथ उलीचिये यही सयानो काम ।।

यदि नाव में जल बढ़ जाये, और घर में धन बढ़ जाये तो दोनों हाथों से उसे उलीचना शुरू कर देना चाहिये, चतुर मनुष्‍यों के यही लक्षण हैं । - घाघ भड्डरी की कहावत

शुक्रवार, 18 अप्रैल 2008

क्षमा और दण्‍ड में अधिक कठिन क्‍या है

दूसरों को दण्‍ड देना सहज है, किन्‍तु उन्‍हें क्षमा करना और उनकी भूल सुधारना अत्‍यधिक कठिन कार्य है भगवान महावीर स्‍वामी

मंगलवार, 15 अप्रैल 2008

मूर्ख को उपदेश देने का लाभ

उपदेशो हि मूर्खाणां प्रकोपाय न शान्‍तये । पय: पानं भुजंगानां केवलं विष वर्धनम् ।।

मूर्ख व्‍यक्ति को उपदेश देने से उसका प्रकोप शान्‍त नहीं होता, जिस प्रकार सर्प को दूध पिलाने से उसका विष कम नहीं होता केवल उसका विष बढ़ता ही है संस्‍कृत का प्रसिद्ध श्र्लोक

सोमवार, 14 अप्रैल 2008

लक्ष्‍मी किसके पास रहती है

लक्ष्‍मी को पाना है तो या तो उल्‍लू बनना होगा या प्रभु विष्‍णु, लक्ष्‍मी केवल इन्‍हीं दोनों के पास ही रहती है । एक की सवारी करती है और एक की सेवा । जितने अंश तक उल्‍लू या विष्‍णु के गुण तुम्‍हारे भीतर होंगे, उतने ही अंश तक लक्ष्‍मी तुम्‍हारे पास रहेगी जेम्‍स एलन

रविवार, 13 अप्रैल 2008

पंच विकार कौन से हैं

काम बुद्धि का हरण करता है, क्रोध विवेक का हरण करता है, अहंकार यश व प्रभाव का हरण करता है, मद लोकप्रियता का हरण करता है, लोभ स्‍वतंत्रता का हरण करता है, मोह राज्‍य व लोक का हरण कर लेता है, जिसमें इन पॉंचो की ही उपस्थिति हो उसका तो कहना ही क्‍या पतन सुनिश्चित तो है ही उसे इस लोक तो क्‍या पाताल में भी स्‍थान नहीं मिलता श्रीमद्भगवद

शुक्रवार, 11 अप्रैल 2008

यथा भोजन, तथा बुद्धि, यथा बुद्धि तथा कर्म, यथा कर्म तथा फल

भोजन तीन प्रकार का होता है, प्रत्‍येक मनुष्‍य को अपनी रूचि व संस्‍कारों के अनुसार यह सतोगुणी, रजोगुणी व तमोगुणी भोजन प्रिय होता है, जैसा मनुष्‍य भोजन करता है उसी के अनुसार उसकी बुद्धि हो जाती है, बुद्धि के अनुसार ही उसमें वैसी ही चेतना व ज्ञान उत्‍पन्‍न हो जाता है । ज्ञान से उसके कर्म का निर्धारण होता है, और वह फिर जैसा कर्म करता है वैसा ही उसे फल प्राप्‍त होता है भगवान श्रीकृष्‍ण श्रीमद्भगवद्गीता

समस्‍याओं के निदान का सर्वोत्‍तम तरीका

आगत विगत का भार एक साथ उठा कर चलने से अच्‍छे से अच्‍छा पराक्रमी भी लड़खड़ा जाता है, मनुष्‍य को दूरस्‍थ व संभावित संकटों एवं परेशानी की चिन्‍ता करने के बजाय आसन्‍न व सन्निकट कठिनाईयों व समस्‍याओं के निदान हेतु तत्‍पर होना चाहिये डेल कार्नेगी

बुधवार, 9 अप्रैल 2008

मनुष्‍य के उत्‍थान व पतन की सीमायें कितनी हैं

प्रत्‍येक मनुष्‍य एक वृत्‍त पर चलता है, यह वृत्‍त सीधा खड़ा होता है और हर मनुष्‍य के लिये इसका व्‍यास अलग अलग है, जिस पर चलकर वह एक निश्चित अवस्‍था या बिन्‍दु से अधिक नीचे नहीं जा सकता, इसी प्रकार एक निश्चित स्थिति या बिन्‍दु से अधिक ऊपर वह नहीं जा सकता, इन बिन्‍दुओं से आगे बढ़ने पर दूसरी अवस्‍था की ओर मनुष्‍य स्‍वत: बढ़ जाता है, इसमें पीछे की ओर चलना संभव नहीं, ये बिन्‍दु ही मनुष्‍य की उपलब्धियों व पतन का निर्धारण करते हैं स्‍वामी विवेकानन्‍द      

सोमवार, 7 अप्रैल 2008

विश्‍वास, जुल्‍म, डर और भय के भेद

चूंकि एक राजनीतिज्ञ कभी भी अपने कहे पर विश्वास नहीं करता, उसे आश्चर्य होता है जब दूसरे उस पर विश्वास करते हैं चार्ल्स द गाल
जालिम का नामोनिशां मिट जाता है, पर जुल्म रह जाता है- महात्‍मा गांधी
डर सदैव अज्ञानता से पैदा होता है एमर्सन
कांटों को मुरझाने का डर नहीं सताता.- चाणक्‍य

उन्‍नति का पथ और अचेत जागरण

सूर्य की तरफ मुँह करो और तुम्हारी छाया तुम्हारे पीछे होगी माओरी
जो व्यक्ति सोने का बहाना कर रहा है उसे आप उठा नहीं सकते नवाजो

शनिवार, 5 अप्रैल 2008

दोरंगे व्‍यवहार के लक्षण क्‍या हैं

मेरे घर में मेरा ही हुक्म चलता है बस, निर्णय मेरी पत्नी लेती है. वूडी एलन
मुट्ठियां बाँध कर आप किसी से हाथ नहीं मिला सकते इंदिरा गांधी

शुक्रवार, 4 अप्रैल 2008

किसी को व्‍यस्‍त कैसे रखा जाये

किसी व्यक्ति को एक मछली दे दो तो उसका पेट दिन भर के लिए भर जाएगा. उसे इंटरनेट चलाना सिखा दो तो वह हफ़्तों आपको परेशान नहीं करेगा. एनन

गुरुवार, 3 अप्रैल 2008

कार्य की सफलता हेतु श्रेय किसको

यदि आप इस बात की चिंता न करें कि आपके काम का श्रेय किसे मिलने वाला है तो आप आश्चर्यजनक कार्य कर सकते हैं हैरी एस. ट्रूमेन